

डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रही 19 वर्षीय छात्रा की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घर से सामान्य तरीके से निकली बेटी के बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत की खबर पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देगी।
परिजनों के मुताबिक छात्रा घर से यह कहकर निकली थी कि वह मोमोज लेकर वापस आएगी, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। कुछ समय बाद नर्मदा नदी के किनारे उसका शव मिलने की सूचना मिली। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया।
मां की चीखों से गूंज उठा घर
परिवार पर दुखों का एक और पहाड़ तब टूट पड़ा, जब घर में मां ने बेटी के कमरे का दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। बार-बार आवाज लगाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो खिड़की से झांककर देखा गया।
अंदर का दृश्य देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। 19 वर्षीय बेटी फंदे से लटकी हुई थी। मां की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य दौड़े और तुरंत शव को नीचे उतारा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूरे घर में चीख-पुकार मच गई।
पिता का छलका दर्द
अपनी बेटी को खो चुके पिता ने नम आंखों से कहा,
“अगर मुझे पता होता कि डॉक्टर बनने का सपना मेरी बेटी पर इतना भारी पड़ जाएगा, तो मैं उसे कभी NEET की तैयारी ही नहीं करने देता।”
पिता के इस बयान ने हर उस परिवार को सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिसके बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। फिलहाल मौत के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता मानसिक दबाव
देशभर में NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र लगातार मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का तनाव, भविष्य की चिंता और अपेक्षाओं का बोझ कई छात्रों के लिए गंभीर मानसिक चुनौती बन सकता है। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
