इंदौर में CM मोहन यादव का बड़ा बयान: ‘रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक की अपेक्षा’, MP में समान नागरिक संहिता की तैयारी तेज

इंदौर में CM मोहन यादव का बड़ा बयान: ‘रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक की अपेक्षा’, MP में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में 300 बिस्तरीय नए जिला चिकित्सालय के लोकार्पण समारोह के दौरान समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि एक देश में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानून होना उचित नहीं है और सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक की अपेक्षा’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में विवाह संबंधी कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि भगवान राम ने एक पत्नी का आदर्श प्रस्तुत किया है तो समाज में सभी से समान अपेक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा,

“अगर रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है। मुस्लिम बहनें भी हमारी बहन हैं। उनके जीवन में भी कठिनाइयां आती हैं, इसलिए उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी एक वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एक देश में अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और यहां सभी नागरिकों के लिए समान कानून होने चाहिए। वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों में विभिन्न समुदायों के अलग-अलग कानून लागू हैं। सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय मिलेगा।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी और धारा 370 का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक निशान, एक प्रधान और एक विधान’ के विचार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर उस संकल्प को आगे बढ़ाया और अब मध्यप्रदेश सरकार भी उसी भावना के साथ समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी समिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस विषय पर जल्दबाजी नहीं की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती तो विधानसभा में सीधे विधेयक पारित करा सकती थी, लेकिन व्यापक जनभागीदारी को प्राथमिकता दी गई।

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई, जिसने प्रदेश के सभी 55 जिलों और 10 संभागों का दौरा कर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए। इन सुझावों का अध्ययन और संकलन करने के बाद सरकार अब विधानसभा में कानून लाने की तैयारी कर रही है।

300 बिस्तरीय जिला अस्पताल का हुआ लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने इंदौर में करीब 83.16 करोड़ रुपये की लागत से बने चार मंजिला 300 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय का लोकार्पण भी किया। यह अस्पताल पश्चिमी इंदौर के लाखों लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

हालांकि अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। पहले चरण में केवल 34 बिस्तरों वाली प्रसूति (मैटरनिटी) विंग को चालू किया गया है। शेष 266 बेड तथा मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स सहित अन्य प्रमुख विभाग आगामी चरणों में शुरू किए जाएंगे।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देना, महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना और व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त करना है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के हितों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून उनके अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

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