

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ओरिजिनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए एक नई और गंभीर चुनौती सामने आई है। आरोप है कि कुछ अज्ञात लोग मेटा (Meta) के कॉपीराइट सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रहे हैं। इसके लिए फेसबुक के एडिट फीचर का इस्तेमाल कर पोस्ट की तारीख को बैकडेट (Backdate) किया जा रहा है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि कंटेंट पहले उन्हीं के द्वारा प्रकाशित किया गया था।
इस पूरे मामले को लेकर देश के दो प्रसिद्ध डिजिटल क्रिएटर्स पुष्कर राज ठाकुर और नीरज जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने मेटा के खिलाफ कॉमर्शियल सूट दायर करते हुए दावा किया है कि कंपनी का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई कर रहा है, जिससे असली कंटेंट क्रिएटर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कैसे हो रहा है फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का खेल?
क्रिएटर्स का आरोप है कि कुछ लोग फेसबुक पर पहले से प्रकाशित पोस्ट को एडिट कर उसकी तारीख बदल देते हैं। इसके बाद उसी कंटेंट के आधार पर इंस्टाग्राम पर मौजूद असली वीडियो या पोस्ट के खिलाफ कॉपीराइट शिकायत दर्ज कराई जाती है।
मेटा का ऑटोमेटेड सिस्टम इन शिकायतों पर बिना गहन जांच के कार्रवाई कर देता है और ओरिजिनल क्रिएटर के वीडियो को हटा देता है या उस पर कॉपीराइट स्ट्राइक लगा देता है। इससे कंटेंट की रीच कम हो जाती है, अकाउंट पर पेनल्टी लगती है और बार-बार स्ट्राइक आने पर अकाउंट बंद होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि मेटा का कॉपीराइट सिस्टम वीडियो के वास्तविक निर्माता, मेटाडेटा, एडिट हिस्ट्री और वास्तविक अपलोड टाइमलाइन की जांच किए बिना केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई कर देता है।
क्रिएटर्स का कहना है कि यदि सिस्टम इन तकनीकी जानकारियों का सत्यापन करे तो फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक को आसानी से रोका जा सकता है।
पुष्कर राज ठाकुर का दावा
डिजिटल क्रिएटर पुष्कर राज ठाकुर ने कोर्ट में बताया कि फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक के कारण उनके कई वीडियो हटा दिए गए, कुछ वीडियो डिसेबल कर दिए गए और कई कंटेंट की रीच सीमित कर दी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेटा ने उन्हें अपना Rights Manager टूल उपलब्ध नहीं कराया, जबकि यही टूल कथित रूप से जालसाज उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रहे थे।
ठाकुर का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया से उनके फॉलोअर्स घटे, स्पॉन्सरशिप के अवसर प्रभावित हुए और उनकी व्यावसायिक साख को नुकसान पहुंचा।
नीरज जोशी के मामले में कोर्ट का आदेश
डिजिटल क्रिएटर नीरज जोशी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मेटा को निर्देश दिया कि यदि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट अभी तक स्थायी रूप से बंद नहीं हुआ है, तो कंपनी उनकी शिकायतों की जांच करेगी और उनके वेरिफाइड अकाउंट को सुरक्षित रखेगी।
कोर्ट ने मेटा को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित Basic Subscriber Information (BSI) और IP Logs उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। इन रिकॉर्ड्स के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा सकेगी जिन्होंने कथित रूप से फर्जी कॉपीराइट शिकायतें दर्ज कीं।
मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।
पुष्कर राज ठाकुर केस में क्या हुआ?
इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा से पूछा कि उसने अपने प्लेटफॉर्म के इस प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।
बाद की सुनवाई में मेटा ने अदालत को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक पुष्कर राज ठाकुर के वीडियो कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर नहीं हटाए जाएंगे और बार-बार शिकायतों के कारण उनका अकाउंट भी बंद नहीं किया जाएगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि हटाए गए वीडियो के यूआरएल उपलब्ध कराए जाने पर उन्हें बहाल (Restore) किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को तय की गई है।
₹2 करोड़ मुआवजे की मांग
पुष्कर राज ठाकुर ने अदालत से मांग की है कि मेटा को निर्देश दिया जाए कि वह केवल सत्यापित दावों के आधार पर ही कॉपीराइट कार्रवाई करे।
उन्होंने प्लेटफॉर्म पर निम्न सुरक्षा उपाय लागू करने की भी मांग की है—
- KYC आधारित सत्यापन
- टाइमस्टैम्प सुरक्षा
- मेटाडेटा वेरिफिकेशन
- एंटी-मैनिपुलेशन सिस्टम
- फर्जी कॉपीराइट शिकायतों की स्वतंत्र जांच
इसके अलावा उन्होंने फॉलोअर्स, विज्ञापन आय, स्पॉन्सरशिप और प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए लगभग ₹2 करोड़ के मुआवजे की मांग की है।
क्या है Meta Rights Manager?
Rights Manager मेटा का ऐसा टूल है जो बड़े कंटेंट क्रिएटर्स, मीडिया संस्थानों और पब्लिशर्स को उनके वीडियो, ऑडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के कॉपीराइट की सुरक्षा करने की सुविधा देता है।
क्या होती है Copyright Strike?
जब कोई व्यक्ति किसी अन्य के कॉपीराइट वाले कंटेंट को बिना अनुमति अपलोड करता है और मूल मालिक शिकायत दर्ज करता है, तो मेटा संबंधित कंटेंट को हटा सकता है और अकाउंट पर कॉपीराइट स्ट्राइक दर्ज कर देता है।
यदि किसी अकाउंट पर लगातार कई स्ट्राइक आती हैं, तो उसका अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
क्रिएटर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला केवल दो डिजिटल क्रिएटर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों कंटेंट क्रिएटर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अदालत इस मामले में मेटा को अपने कॉपीराइट सिस्टम में बदलाव करने के निर्देश देती है, तो भविष्य में फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक जैसी घटनाओं पर रोक लग सकती है और ओरिजिनल कंटेंट बनाने वालों को बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।
