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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: यात्रियों को ‘सेकेंड क्लास’ कहना गलत, 10 साल पुराने ट्रेन हादसे में पीड़ित परिवार को ₹8 लाख मुआवजे का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: यात्रियों को ‘सेकेंड क्लास’ कहना गलत, 10 साल पुराने ट्रेन हादसे में पीड़ित परिवार को ₹8 लाख मुआवजे का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: यात्रियों को ‘सेकेंड क्लास’ कहना गलत, 10 साल पुराने ट्रेन हादसे में पीड़ित परिवार को ₹8 लाख मुआवजे का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे यात्रियों की गरिमा और अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी यात्री को 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' कहना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'सेकेंड क्लास' शब्द का इस्तेमाल केवल रेलवे कोच की श्रेणी के लिए होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की पहचान या दर्जे के लिए। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 10 साल पुराने ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्री के परिवार को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि केवल टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर पीड़ित परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्ट...
महिला का सीना दबाना और सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं? पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- जज गाइडलाइन पढ़ें
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महिला का सीना दबाना और सलवार उतारना रेप की कोशिश नहीं? पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- जज गाइडलाइन पढ़ें

महिला की छाती दबाना, सलवार उतारना... क्या यह रेप की कोशिश नहीं? पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों से जुड़े मामलों में एक अहम सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून की व्याख्या बेहद संवेदनशील और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए। मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि किसी महिला के साथ बंद कमरे में जबरदस्ती की गई, उसका सीना दबाया गया और सलवार उतारने की कोशिश की गई, तो केवल इन तथ्यों के आधार पर इसे "रेप की कोशिश" (Attempt to Rape) नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने हाईकोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। क्या था पूरा मामला? मामले में आर...
दूसरी शादी छिपाना कितना आसान? क्या Central Digital Marriage Registry से रुकेगी धोखाधड़ी | Bigamy Law India Explained
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दूसरी शादी छिपाना कितना आसान? क्या Central Digital Marriage Registry से रुकेगी धोखाधड़ी | Bigamy Law India Explained

Central Digital Marriage Registry भारत तेजी से डिजिटल हो रहा है। बैंकिंग से लेकर टैक्स, पहचान पत्र से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था लागू हो चुकी है। लेकिन एक ऐसा महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक विषय है, जहां आज भी देश में एक समान डिजिटल व्यवस्था मौजूद नहीं है—विवाह पंजीकरण। यही वजह है कि समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें एक व्यक्ति पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी कर लेता है और पहली पत्नी या पति को इसकी जानकारी तक नहीं होती। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि पहली शादी पहले से मौजूद थी, तो दूसरी शादी कैसे हो गई? क्या हमारा मौजूदा सिस्टम इस तरह की धोखाधड़ी को पहले ही रोक सकता है? इन्हीं सवालों ने अब एक नई बहस को जन्म दिया है—क्या भारत को एक Central Digital Marriage Registry की आवश्यकता है? भारत में विवाह पंजीकरण की मौजूदा व्यवस...