ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों को एक साल बाद मिला राष्ट्रीय सम्मान, जानिए क्यों देर से जुड़े नाम नेशनल वॉर मेमोरियल में

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वर्ष 2025 में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों के नाम आखिरकार लगभग एक साल बाद नेशनल वॉर मेमोरियल के ‘त्याग चक्र’ (Tyag Chakra) पर हमेशा के लिए अंकित कर दिए गए हैं। यह सम्मान राष्ट्र की ओर से उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने सीमा पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

जिन सैन्यकर्मियों के नाम स्मारक में जोड़े गए हैं, उनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र), लांस नायक दिनेश कुमार, एविएशन मूड मुरलीनायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह (भारतीय सेना) और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना मेडल) शामिल हैं।

इन सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में लगभग एक वर्ष बाद दर्ज होने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह देरी किसी भी तरह से शहीदों की संख्या छिपाने या जानकारी रोकने के लिए नहीं थी।

सरकार के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों में किसी भी युद्ध या सैन्य अभियान में शहीद हुए जवान को आधिकारिक रूप से ‘बैटल कैजुअल्टी’ घोषित करने के लिए एक निर्धारित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही संबंधित सैनिक का नाम नेशनल वॉर मेमोरियल के रोल ऑफ ऑनर में स्थायी रूप से शामिल किया जाता है।

यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए इन छह वीर सैनिकों के नाम अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के त्याग चक्र पर अंकित किए गए हैं। इसके साथ ही राष्ट्र ने एक बार फिर अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को हमेशा के लिए इतिहास में अमर कर दिया।

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