कैलाश विजयवर्गीय का सीएम मोहन यादव को पत्र: ‘ढाई साल से मिला सिर्फ असहयोग और उपेक्षा’, दिग्विजय सिंह बोले- आपकी पीड़ा समझ रहा हूं

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक विस्तृत पत्र लिखकर सरकार के भीतर ही असहयोग और उपेक्षा का आरोप लगाया है। अपने पत्र में विजयवर्गीय ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों से उन्हें लगातार असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यदि इंदौर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो जनता की आवाज़ को सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी मजबूरी होगी।

इस पत्र के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “आपकी पीड़ा और दर्द मैं समझ रहा हूं।”


इंदौर को नहीं मिल रहा न्यायोचित हक: विजयवर्गीय

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विजयवर्गीय ने कहा कि वे प्रदेश सरकार में मंत्री होने के साथ-साथ इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। ऐसे में उन्हें सरकार और प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा थी, लेकिन उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके विभाग से जुड़े कई स्थानांतरण उनकी जानकारी के बिना कर दिए गए।

विजयवर्गीय का कहना है कि इंदौर जैसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहर को उसका न्यायोचित अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।


दो साल से अटका इंदौर का मास्टर प्लान

पत्र में विजयवर्गीय ने बताया कि इंदौर का मास्टर प्लान लगभग दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जा चुका है। विभागीय स्तर और मुख्य सचिव स्तर पर कई बैठकों के बावजूद अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी कई पत्र लिखे गए, लेकिन न कोई जवाब मिला और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।


मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम पर भी जताई नाराजगी

विजयवर्गीय ने “उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन” नाम पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र इंदौर है और पूरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर केंद्रित है। इसके बावजूद अधिसूचना में उज्जैन को पहले स्थान पर रखा गया, जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से इंदौर का हिस्सा कहीं अधिक है।


RGPV के विभाजन में इंदौर की अनदेखी का आरोप

पत्र में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के प्रस्तावित पुनर्गठन का भी उल्लेख किया गया है। विजयवर्गीय ने कहा कि भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नई इकाइयों का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन इंदौर जैसे बड़े शिक्षा केंद्र को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने याद दिलाया कि 1952 से स्थापित श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (SGSITS) और इंदौर में संचालित 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज इस शहर को तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाते हैं।


पीथमपुर उद्योगों की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया

विजयवर्गीय ने कहा कि पीथमपुर में 650 से अधिक MSME इकाइयां और 176 से ज्यादा बड़े उद्योग संचालित हैं। इसके बावजूद यहां राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब, प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं आज तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए औद्योगिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है जबकि पीथमपुर लगातार उपेक्षा का शिकार है।


एयरपोर्ट विस्तार और सिंहस्थ को लेकर भी नाराजगी

पत्र में इंदौर एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध न कराए जाने, सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों में इंदौर की अनदेखी और जल संकट के दौरान पर्याप्त राहत नहीं मिलने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है।


मीडिया के सवाल पर क्या बोले विजयवर्गीय?

जब मीडिया ने इस पत्र के बारे में सवाल पूछा तो विजयवर्गीय ने कहा कि “मुझे नहीं पता यह जानकारी आपको कहां से मिली।” हालांकि, पत्र सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


RSS पर भी दिया बड़ा बयान

भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संगठन का विस्तार तो हुआ है, लेकिन पहले जैसे समर्पित और अच्छे लोगों की कमी महसूस हो रही है।

उन्होंने कहा,

“संघ में लोगों की भीड़ तो बढ़ गई है, लेकिन अच्छे लोगों की कमी होती जा रही है। संगठन और विचारधारा दोनों बढ़ रहे हैं, लेकिन यदि अच्छे लोग नहीं होंगे तो विचारधारा का महत्व भी कम हो जाएगा।”


राजनीतिक मायने क्या हैं?

कैलाश विजयवर्गीय का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब मध्य प्रदेश सरकार विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती पर जोर दे रही है। सरकार के वरिष्ठ मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से असहयोग और उपेक्षा के आरोप लगाए जाने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

यदि सरकार की ओर से इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में इसका असर और अधिक देखने को मिल सकता है।

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