

चीन का नया ‘मिसाइल मैसेज’: परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, हिंद-प्रशांत में बढ़ा तनाव, भारत के लिए क्या हैं मायने?
इस मिसाइल परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंता जताई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षा और शक्ति प्रदर्शन का संकेत है।
क्या है पूरा मामला?
चीन ने अपनी परमाणु पनडुब्बी से लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। ऐसी मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हो सकती हैं और इन्हें समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों से दागा जाता है। यही वजह है कि इन्हें किसी भी देश की रणनीतिक परमाणु क्षमता का सबसे मजबूत आधार माना जाता है।
समुद्र की गहराई में मौजूद पनडुब्बी का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में इस तरह की मिसाइल क्षमता किसी भी देश की जवाबी परमाणु हमले की ताकत को और मजबूत बनाती है।
क्यों बढ़ी दुनिया की चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार चीन का यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना है कि इस तरह के सैन्य परीक्षण क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना है कि सैन्य शक्ति के लगातार प्रदर्शन से तनाव बढ़ने और हथियारों की प्रतिस्पर्धा तेज होने का खतरा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
भारत सीधे प्रशांत महासागर में नहीं है, लेकिन हिंद-प्रशांत रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। चीन की नौसैनिक गतिविधियां लगातार हिंद महासागर क्षेत्र तक बढ़ रही हैं। ऐसे में उसकी पनडुब्बी क्षमता और लंबी दूरी की मिसाइलों का विकास भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर रणनीतिक विषय बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भारत को अपनी समुद्री निगरानी क्षमता, नौसेना की ताकत और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है।
हिंद-प्रशांत में क्यों बढ़ रहा है तनाव?
हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक धुरी बन चुका है। इसी क्षेत्र से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
एक तरफ चीन अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देश भी समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य परीक्षण को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाता है।
आगे क्या?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति, परमाणु पनडुब्बियों का विस्तार और मिसाइल परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए यह घटनाक्रम केवल पड़ोसी देश की सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा, रक्षा तैयारियों और रणनीतिक साझेदारियों की समीक्षा का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
