

पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद फिल्म को हटा दिया गया। अब केंद्र सरकार ने फिल्म की समीक्षा के लिए एक रिव्यू कमेटी का गठन किया है। यह कदम भाजपा पंजाब के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की अपील के बाद उठाया गया है। भाजपा नेता आरपी सिंह ने भी कमेटी के गठन की पुष्टि की है।
सरकार का कहना है कि फिल्म की सामग्री, तथ्यों और प्रस्तुति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि फिल्म को OTT पर रिलीज करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
2 जुलाई को रिलीज, 5 जुलाई को हटा दी गई फिल्म
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ 2 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी। लेकिन रिलीज के महज तीन दिन बाद, 5 जुलाई को इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। शुरुआत में फिल्म हटाने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई, जिससे सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
फिल्म हटने के बाद कई फिल्मकारों और कलाकारों ने इसका विरोध किया और दिलजीत दोसांझ के समर्थन में बयान दिए। फिल्म निर्देशक के समर्थन में मशहूर निर्देशक अनुराग कश्यप भी सामने आए। उन्होंने फिल्म के निर्देशक की तुलना ईरानी फिल्ममेकर से करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए।
IT Rules 2021 के तहत हटाई गई फिल्म
रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Rules, 2021 का हवाला देते हुए ZEE5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिल्म में कुछ ऐसे पहलू थे, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना गया।
सरकार का कहना है कि OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री भी कानून के दायरे में आती है और यदि किसी सामग्री पर गंभीर आपत्ति हो तो सरकार आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ तक का सफर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस फिल्म का मूल नाम ‘Punjab 95’ था। वर्ष 2022 में फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से प्रमाणन के लिए भेजा गया था।
बताया गया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था। लेकिन निर्माताओं ने इन कट्स को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं मिला और इसकी थिएटर रिलीज रुक गई।
बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया और इसे सीधे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया।
सरकार ने क्यों जताई आपत्ति?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भले ही OTT प्लेटफॉर्म सीधे CBFC के दायरे में नहीं आते, लेकिन यदि कोई फिल्म पहले सेंसर प्रक्रिया से गुजर चुकी हो और उसके बाद बिना सुझाए गए बदलावों के किसी नए नाम से रिलीज की जाए, तो यह गंभीर मामला माना जा सकता है।
इसी आधार पर सरकार ने ZEE5 को फिल्म हटाने के निर्देश दिए।
रिव्यू कमेटी क्या करेगी?
केंद्र सरकार द्वारा गठित रिव्यू कमेटी फिल्म के कई पहलुओं की जांच करेगी, जिनमें शामिल हैं—
- फिल्म की सामग्री और तथ्यात्मक प्रस्तुति।
- क्या फिल्म कानून और आईटी नियमों के अनुरूप रिलीज हुई?
- क्या सेंसर प्रक्रिया को दरकिनार किया गया?
- क्या फिल्म राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े किसी मुद्दे को प्रभावित करती है?
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। उन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने का काम किया था।
उनकी पत्नी ने भी वर्षों तक न्याय की लड़ाई लड़ी। इसी संघर्ष को फिल्म में दिखाए जाने का दावा किया जाता है। हालांकि, फिल्म की प्रस्तुति को लेकर शुरू से ही विवाद बना हुआ है।
दिलजीत दोसांझ की अपील
फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों से फिल्म का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने फैंस से फिल्म को अधिक से अधिक देखने और उपलब्ध संस्करणों को साझा करने की बात कही। वहीं, सोशल मीडिया पर फिल्म की पायरेसी से जुड़े लिंक भी तेजी से वायरल होने लगे हैं।

