

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के लगातार बगावती तेवरों के बाद पार्टी नेतृत्व पूरी तरह सतर्क हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में बैठे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने हालात बिगड़ने से पहले ही हस्तक्षेप किया। बताया जा रहा है कि हाईकमान की ओर से एक वरिष्ठ नेता ने चरणजीत सिंह चन्नी से सीधे फोन पर बातचीत कर उन्हें कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेने से फिलहाल रोक दिया। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि पंजाब में ऐसा कोई घटनाक्रम हो, जिससे कांग्रेस को चुनाव से पहले बड़ा नुकसान उठाना पड़े।
बंगाल जैसी स्थिति बनने का डर
कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है कि यदि समय रहते नाराज नेताओं को नहीं मनाया गया तो पंजाब में भी पश्चिम बंगाल जैसी राजनीतिक स्थिति बन सकती है, जहां पार्टी लगातार कमजोर होती चली गई। यही वजह है कि हाईकमान हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की टूट को रोकने की कोशिश कर रहा है।
रंधावा का बड़ा सवाल
इसी बीच कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर यह स्थिति किसकी विफलता है? उन्होंने संकेत दिए कि यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार असंतोष जता रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
रंधावा का यह बयान ऐसे समय आया है जब पंजाब कांग्रेस पहले से ही गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर चर्चाओं में बनी हुई है। उनके बयान ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और उजागर कर दिया है।
चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
2027 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह के आंतरिक विवाद या टूट से बचना चाहती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते मतभेद दूर नहीं किए गए तो इसका सीधा असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
फिलहाल कांग्रेस हाईकमान डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं को एकजुट रखने में सफल होता है या पंजाब कांग्रेस में सियासी संकट और गहरा जाएगा।
