

पंजाब कांग्रेस में सियासी संकट गहराया, चन्नी गुट ने बुलाई इमरजेंसी बैठक
पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बाद अब पंजाब कांग्रेस में भी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है।
इसी नाराजगी के बीच चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने आवास, मोरिंडा में कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की इमरजेंसी बैठक बुलाई। इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और संगठन की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठे सवाल
बैठक के बाद चन्नी समर्थकों ने खुलकर कहा कि राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं है। उनका कहना है कि यदि पंजाब में कांग्रेस को दोबारा मजबूत करना है, तो संगठन की कमान ऐसे नेता को दी जानी चाहिए जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके।
चन्नी गुट ने कांग्रेस हाईकमान से प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। समर्थकों का दावा है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई, तो पार्टी को पंजाब में बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दिल्ली में शाह से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक कांग्रेस सांसद की दिल्ली में शाह से मुलाकात की खबर ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इसे पंजाब कांग्रेस में चल रहे असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व समय रहते असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल नहीं हुआ, तो पार्टी के भीतर बड़ी टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाईकमान के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझ रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन को मजबूत करने की कोशिशें लगातार जारी हैं, लेकिन प्रदेश नेतृत्व को लेकर विवाद ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान पर टिकी है कि वह चन्नी गुट की नाराजगी को कैसे दूर करता है और क्या प्रदेश अध्यक्ष के फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा या नहीं।
