

पीएम मोदी की बधाई बनी सियासी बहस का मुद्दा
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 26 जून को जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई शुभकामनाओं के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों और NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने इसे मुद्दा बनाते हुए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं और एक बार फिर उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक विवाद के बाद से ही धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष के निशाने पर हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी क्रम में जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन भी जारी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या लिखा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा,
“केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य भारत को ज्ञान, सीखने और नवाचार का केंद्र बनाना है। उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
धर्मेंद्र प्रधान ने जताया आभार
प्रधानमंत्री के संदेश का जवाब देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने X पर लिखा,
“माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गर्मजोशी भरी शुभकामनाओं और अनमोल आशीर्वाद के लिए मेरा गहरा आभार। आपका दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण और निरंतर प्रोत्साहन हमें देश और जनता की सेवा के लिए प्रेरित करता है।”
विपक्ष ने साधा निशाना
प्रधानमंत्री की शुभकामना पोस्ट के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि जिस शिक्षा मंत्री पर NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग हो रही है, उन्हें सार्वजनिक रूप से सराहना क्यों दी जा रही है।
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उनका कहना है कि परीक्षा विवाद में छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग कर रहा है। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है।
फिलहाल, प्रधानमंत्री की जन्मदिन शुभकामना के बाद यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
