

दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ OTT से हटाई गई, पंजाब में 25 हजार फर्जी एनकाउंटर के दावे पर बढ़ा विवाद
यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म में उस दौर को दिखाया गया है जब पंजाब आतंकवाद और उग्रवाद की घटनाओं से जूझ रहा था। कहानी में दावा किया गया है कि उस समय हजारों युवाओं की कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों (फेक एनकाउंटर) में मौत हुई थी।
फिल्म में क्या है दावा?
फिल्म के अनुसार, जसवंत सिंह खालड़ा ने अपने मानवाधिकार अभियान के दौरान ऐसे दस्तावेज जुटाए थे, जिनमें आरोप लगाया गया कि पंजाब में करीब 25 हजार लोगों की फर्जी एनकाउंटर के बाद हत्या कर दी गई और उनका अंतिम संस्कार बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के कर दिया गया। यही दावा फिल्म की कहानी का सबसे संवेदनशील और विवादित हिस्सा माना जा रहा है।
OTT से हटाने के बाद बढ़ी चर्चा
फिल्म के अचानक OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद दर्शकों और फिल्म प्रेमियों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अब तक प्लेटफॉर्म या फिल्म निर्माताओं की ओर से इसे हटाने के पीछे आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि संवेदनशील ऐतिहासिक विषय होने के कारण फिल्म की समीक्षा या कानूनी प्रक्रिया के चलते यह फैसला लिया गया हो सकता है।
तीन साल तक रिलीज पर लगी थी रोक
बताया जा रहा है कि इस फिल्म को रिलीज होने से पहले लगभग तीन वर्षों तक विभिन्न कारणों से रोक का सामना करना पड़ा। लंबे इंतजार के बाद जब इसे दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया गया, तो महज दो दिन के भीतर ही इसे OTT से हटा लिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने 1990 के दशक में कथित फर्जी एनकाउंटर और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर करने का दावा किया था। उनके काम को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई थी। उनके जीवन और संघर्ष पर पहले भी कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्में बनाई जा चुकी हैं।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल फिल्म के OTT से हटने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि यह कदम तकनीकी कारणों, कानूनी प्रक्रिया या किसी अन्य वजह से उठाया गया है। दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री की नजर अब निर्माताओं और संबंधित OTT प्लेटफॉर्म की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

