

राजेश खन्ना की पुण्यतिथि: मां-बाप पाकिस्तान चले गए, रिश्तेदारों ने पाला, आखिरी शब्द थे- ‘पैकअप टाइम हो गया’, आशीर्वाद बंगले में मिले फैंस के 65 सूटकेस भरकर तोहफे
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की पुण्यतिथि पर देशभर के करोड़ों प्रशंसक उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। 18 जुलाई 2012 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनकी फिल्मों, अदाकारी और मुस्कान का जादू आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
राजेश खन्ना का जीवन जितना शानदार रहा, उतना ही संघर्षों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भी भरा रहा। बचपन से लेकर सुपरस्टार बनने और फिर जिंदगी के अंतिम दिनों तक उनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
रिश्तेदारों ने किया पालन-पोषण
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ था। देश के विभाजन के दौर में उनके जैविक माता-पिता पाकिस्तान चले गए। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनके करीबी रिश्तेदार चुन्नीलाल और लीलावती खन्ना ने किया और उन्हें गोद लेकर अपना नाम दिया। यहीं से उनका नाम जतिन खन्ना से बदलकर राजेश खन्ना रखा गया।
बचपन से ही अभिनय का शौक रखने वाले राजेश खन्ना ने स्कूल और कॉलेज के दिनों में कई नाटकों में हिस्सा लिया। अभिनय के प्रति उनका जुनून ही उन्हें मुंबई तक ले आया।
टैलेंट प्रतियोगिता से मिला फिल्मों में पहला मौका
1965 में आयोजित एक ऑल इंडिया टैलेंट प्रतियोगिता जीतने के बाद राजेश खन्ना को फिल्मों में काम करने का मौका मिला। उनकी पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ थी, लेकिन उन्हें असली पहचान फिल्म ‘आराधना’ (1969) से मिली।
इसके बाद उन्होंने सफलता का ऐसा इतिहास रचा, जो आज भी बॉलीवुड में मिसाल माना जाता है।
लगातार 15 सुपरहिट फिल्मों का रिकॉर्ड
1969 से 1971 के बीच राजेश खन्ना ने लगातार 15 सुपरहिट फिल्में दीं। यह रिकॉर्ड लंबे समय तक कायम रहा। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—
- आराधना
- आनंद
- कटी पतंग
- अमर प्रेम
- सफर
- हाथी मेरे साथी
- सच्चा झूठा
- दुश्मन
- बावर्ची
- नमक हराम
उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि लड़कियां उनकी तस्वीरों से शादी कर लेती थीं और खून से खत लिखकर भेजती थीं।
आशीर्वाद बंगले के बाहर उमड़ती थी फैंस की भीड़
मुंबई स्थित उनका मशहूर बंगला ‘आशीर्वाद’ फैंस के लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं था। देशभर से लोग उन्हें देखने पहुंचते थे और उपहार देकर लौटते थे।
बताया जाता है कि उनके निधन के बाद बंगले से करीब 65 सूटकेस मिले, जिनमें प्रशंसकों द्वारा वर्षों में भेजे गए उपहार, चिट्ठियां और यादगार सामान सुरक्षित रखा गया था। यह उनके प्रति लोगों के अपार प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया
जीवन के अंतिम वर्षों में राजेश खन्ना की तबीयत लगातार खराब रहने लगी थी। कई बार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था, जबकि उनके प्रशंसक लगातार उनके स्वस्थ होने की दुआ कर रहे थे।
उनके मुंबई स्थित बंगले आशीर्वाद के बाहर रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते थे।
आखिरी शब्द- ‘पैकअप… टाइम हो गया’
परिवार और करीबी लोगों के अनुसार, जीवन के अंतिम समय में राजेश खन्ना ने बेहद भावुक शब्द कहे थे—
“पैकअप… टाइम हो गया।”
फिल्मी दुनिया में शूटिंग खत्म होने पर बोले जाने वाले इस संवाद को उन्होंने अपनी जिंदगी की अंतिम विदाई बना दिया। उनके ये शब्द आज भी उनके प्रशंसकों को भावुक कर देते हैं।
18 जुलाई 2012 को दुनिया को कहा अलविदा
18 जुलाई 2012 को मुंबई स्थित अपने घर आशीर्वाद में राजेश खन्ना ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया।
उनके बंगले के बाहर हजारों प्रशंसक जमा हो गए और नम आंखों से अपने चहेते सुपरस्टार को अंतिम विदाई दी।
आज भी जिंदा है ‘काका’ का जादू
राजेश खन्ना को भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता है। उनकी फिल्मों के गाने, संवाद और अभिनय आज भी नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हैं। उनकी विरासत भारतीय सिनेमा के इतिहास का अमूल्य हिस्सा है।
पुण्यतिथि पर देशभर के प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उनकी यादों को नमन कर रहे हैं।
