

बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार अरशद वारसी अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। लेकिन उनकी असली जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन के उस दर्दनाक दौर को याद किया, जिसे वे आज भी भूल नहीं पाए हैं।
अरशद वारसी ने बताया कि जब वे सिर्फ 14 साल के थे, तब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार थीं। डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए सलाह दी थी कि उन्हें पानी न दिया जाए। मां बार-बार पानी मांग रही थीं, लेकिन डॉक्टर की बात मानते हुए उन्होंने मां को पानी नहीं पिलाया। कुछ ही घंटों बाद उनकी मां का निधन हो गया।
अरशद कहते हैं कि यह फैसला आज भी उन्हें अंदर तक परेशान करता है। उन्हें लगता है कि काश उन्होंने अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी कर दी होती। यही एक ऐसा दर्द है, जो वर्षों बाद भी उनके दिल में जिंदा है।
कम उम्र में उठ गया माता-पिता का साया
अरशद वारसी का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता। पहले मां का निधन हुआ और कुछ समय बाद पिता भी दुनिया छोड़कर चले गए। माता-पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई।
आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि पढ़ाई भी बीच में छोड़नी पड़ी। घर चलाने के लिए उन्होंने कई छोटे-बड़े काम किए। संघर्ष के उन दिनों में उन्होंने लिपस्टिक और कॉस्मेटिक सामान बेचने तक का काम किया ताकि रोजमर्रा का खर्च पूरा हो सके।
संघर्ष से शुरू हुआ फिल्मी सफर
मुश्किल हालात के बावजूद अरशद ने कभी हार नहीं मानी। उन्हें डांस में रुचि थी और इसी वजह से उन्होंने डांस ग्रुप के साथ काम करना शुरू किया। बाद में वे कोरियोग्राफी से जुड़े और धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने लगे।
साल 1996 में फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ से उन्होंने बॉलीवुड में बतौर अभिनेता कदम रखा। हालांकि शुरुआती दौर आसान नहीं था और उन्हें सफलता के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
‘सर्किट’ बनने के बाद बदल गई किस्मत
अरशद वारसी के करियर का सबसे बड़ा मोड़ फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने ‘सर्किट’ का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया। हालांकि खुद अरशद को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि यह किरदार इतना लोकप्रिय हो जाएगा।
उन्होंने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि उन्हें नहीं लगा था कि ‘सर्किट’ का किरदार उनके करियर की पहचान बन जाएगा। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद उनकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई और वे बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा अभिनेताओं में शामिल हो गए।
आज भी नहीं भूले संघर्ष के दिन
आज अरशद वारसी सफल अभिनेता हैं और उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया है, लेकिन वे अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भूलते। उनका मानना है कि मुश्किल समय ने ही उन्हें मजबूत बनाया और जीवन की असली कीमत सिखाई।
मां के आखिरी पलों की याद आज भी उन्हें भावुक कर देती है। वे मानते हैं कि जीवन में सफलता मिलने के बावजूद कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जो कभी खत्म नहीं होते।
