

बद्रीनाथ धाम में VIP दर्शन शुल्क पर नया विवाद, 1.63 करोड़ की आय पर उठे सवाल
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक और वित्तीय विवाद सामने आ गया है। इस बार मामला VIP दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से वसूले गए शुल्क का है। आरोप है कि बिना मंदिर समिति या बोर्ड की औपचारिक मंजूरी के VIP दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपये का शुल्क लागू किया गया, जिससे अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपये की राशि जमा हो चुकी है।
उपाध्यक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि VIP दर्शन शुल्क लागू करने का कोई प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में पारित नहीं किया गया था। उनका कहना है कि यदि बोर्ड की मंजूरी के बिना यह शुल्क वसूला गया है, तो यह प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शुल्क किसके आदेश पर लागू किया गया तथा उससे प्राप्त राशि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया।
1.63 करोड़ रुपये की आय पर चर्चा तेज
जानकारी के अनुसार, VIP दर्शन व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 1100 रुपये लिए गए। इस व्यवस्था से अब तक लगभग 1.63 करोड़ रुपये की आय होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस राशि का आधिकारिक लेखा-जोखा और उसके उपयोग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि मंदिरों में आर्थिक पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।
चढ़ावा विवाद के बाद दूसरा बड़ा मामला
हाल ही में बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भी विवाद सामने आया था। उस मामले की चर्चा अभी जारी है और अब VIP दर्शन शुल्क का मुद्दा जुड़ने से मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
इन लगातार सामने आ रहे मामलों ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि मंदिर से जुड़े वित्तीय निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए जा रहे हैं और उनकी निगरानी कैसे की जा रही है।
पारदर्शिता की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद कई लोगों ने मांग की है कि VIP दर्शन शुल्क से संबंधित सभी दस्तावेज, बोर्ड की बैठक के रिकॉर्ड और आय-व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बद्रीनाथ धाम के प्रशासनिक ढांचे और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
