राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट कोषाध्यक्ष बोले- ‘करीब 3 करोड़ की चोरी हुई’, अखिलेश के खिलाफ लगे पोस्टर

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने पहली बार इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके अनुमान के अनुसार मंदिर के चढ़ावे में करीब 3 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई हो सकती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 14 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी होने के दावों को लेकर अभी आधिकारिक जांच चल रही है और वास्तविक नुकसान का आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और भारी मात्रा में नकद, सोना-चांदी एवं अन्य कीमती वस्तुएं दान स्वरूप चढ़ाते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

मामले की जांच जारी

चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रस्ट का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और आधुनिक बनाया जाएगा।

राजनीति भी हुई तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। अयोध्या में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर लिखा गया—

“दिल में बाबर, मुंह में राम”

इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा समर्थक संगठनों और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्ष का कहना है कि चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीतिक रंग देने के आरोपों को खारिज कर रहा है।

श्रद्धालुओं की चिंता

राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में चोरी की खबर सामने आने के बाद भक्तों ने भी पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि मंदिर में आने वाले दान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।

आगे क्या?

अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चोरी की वास्तविक राशि कितनी है, किन लोगों की भूमिका रही और ट्रस्ट भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह और मजबूत करेगा।

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