

सोनम वांगचुक का अनशन 17वें दिन भी जारी, बॉलीवुड से मिला समर्थन; ओमी वैद्य बोले- ‘मैं नहीं चाहता फुंसुख वांगडू मर जाएं’
लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन सोमवार (14 जुलाई) को 17वें दिन भी जारी रहा। वे अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल कर रहे हैं। इस बीच बॉलीवुड की कई हस्तियों ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई है और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत करने की अपील की है।
सबसे पहले फिल्म ‘3 इडियट्स’ में चतुर रामलिंगम (साइलेंसर) का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि “फुंसुख वांगडू” की प्रेरणा बने वास्तविक जीवन के व्यक्ति सोनम वांगचुक को किसी तरह का नुकसान पहुंचे।
ओमी वैद्य ने कहा,
“मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं। मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग सोनम वांगचुक के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
जीनत अमान ने सरकार से की बातचीत की अपील
वहीं, बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री जीनत अमान ने भी सोनम वांगचुक के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि वह वांगचुक की मांगों का सम्मान करती हैं और उनका मानना है कि इस मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए।
जीनत अमान ने अपने संदेश में कहा कि—
“मैं सोनम वांगचुक की मांगों का सम्मान करती हूं। भारत सरकार से मेरी अपील है कि इस मुद्दे पर उनसे बातचीत की जाए। यह केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य से जुड़ा विषय है। अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए।”
देशभर में बढ़ रही समर्थन की आवाज
सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है। कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने भी उनके समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। समर्थकों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
क्यों चर्चा में हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध इंजीनियर, नवाचारकर्ता और शिक्षा सुधारक हैं। उनकी जीवन यात्रा से प्रेरित होकर ही आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘3 इडियट्स’ में फुंसुख वांगडू का किरदार गढ़ा गया था। वे लंबे समय से लद्दाख, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाते रहे हैं।

