

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को गुप्त रूप से चेतावनी दी थी कि इजराइल शांति वार्ता में शामिल ईरान के दो शीर्ष नेताओं—विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ—को निशाना बना सकता है। बताया जा रहा है कि यह चेतावनी उस समय दी गई जब दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने और कूटनीतिक समाधान निकालने की कोशिशें जारी थीं।
क्या था पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि इजराइल ईरान के उन नेताओं पर हमला कर सकता है जो अमेरिका के साथ चल रही संवेदनशील वार्ताओं में अहम भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका का मानना था कि यदि ऐसे नेताओं पर हमला हुआ तो न केवल वार्ता पूरी तरह विफल हो जाएगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष और अधिक भड़क सकता है।
अराघची और गालिबाफ क्यों थे अहम?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो युद्धविराम, तनाव कम करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहा था। दोनों नेताओं की भूमिका को वार्ता की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
अमेरिका ने कैसे पहुंचाया संदेश?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने सीधे सार्वजनिक बयान देने के बजाय मध्यस्थ देशों और बैक-चैनल कूटनीतिक माध्यमों के जरिए ईरान तक यह संदेश पहुंचाया कि उसके शीर्ष वार्ताकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन नहीं चाहता था कि वार्ता के दौरान किसी भी तरह की लक्षित कार्रवाई से पूरा कूटनीतिक प्रयास पटरी से उतर जाए।
मध्य पूर्व में बढ़ सकती थी अस्थिरता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता में शामिल किसी शीर्ष ईरानी नेता की हत्या होती, तो इसका असर केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहता। इससे पूरे मध्य पूर्व में सैन्य तनाव कई गुना बढ़ सकता था और अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिशों को भी बड़ा झटका लग सकता था।
आधिकारिक पुष्टि नहीं
हालांकि, इस मामले में अमेरिका और इजराइल की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सामने आई जानकारी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और उन अधिकारियों के हवाले से है जो घटनाक्रम से परिचित बताए गए हैं।
