

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को 14 बिंदुओं वाले एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बनी थी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को रोकना और क्षेत्र में शांति बहाल करना था।
हालांकि, समझौते के कुछ ही दिनों बाद होर्मुज़ स्ट्रेट में दोनों देशों के बीच हमलों की खबरें सामने आईं। अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिससे यह समझौता फिर चर्चा में आ गया।
Article 5 को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
मीडिया रिपोर्टों में जिस “Article 5” की चर्चा हो रही है, उसे समझौते के सबसे अहम प्रावधानों में से एक बताया जा रहा है। इसके तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने तथा किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई से बचने की बात कही गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस कथित 14-बिंदु MoU का पूरा आधिकारिक पाठ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए “Article 5” से जुड़ी अधिकांश जानकारी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुज़ स्ट्रेट में क्यों बढ़ा तनाव?
समझौते के बावजूद हाल के दिनों में होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम तोड़ने का आरोप लगाया।
इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही सामान्य रह सकेगी। साथ ही युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत दोबारा शुरू करने की बात भी कही गई।
ईरान की क्या है प्रतिक्रिया?
अब तक ईरान ने उन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिनमें कहा गया है कि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट में हमले रोकने पर सहमति दे दी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश समझौते की शर्तों का पालन करते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि संघर्ष विराम का उल्लंघन जारी रहता है, तो मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़ा सैन्य संकट पैदा होने की आशंका बनी रहेगी।
