

ईरान के मिसाइल हमले में भारतीय की मौत, होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर निशाना; अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार और भारतीय नागरिकों पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में सोमवार देर रात ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला कर दिया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत कुल आठ लोग घायल हुए हैं।
घटना के बाद भारत सरकार ने मामले पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजनयिक (Diplomat) को तलब कर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने ईरान से घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की बड़ी खेप इसी रास्ते से गुजरती है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर लगातार हमले होते रहे तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
अमेरिका की 5 घंटे की बमबारी के बाद बढ़ा तनाव
इस घटना से पहले अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक लगातार हवाई हमले किए थे। अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने समुद्री क्षेत्र में जवाबी हमला करते हुए तेल टैंकरों को निशाना बनाया।
दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता
हमले में घायल भारतीय नागरिकों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में जारी है। भारतीय दूतावास लगातार प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
वैश्विक बाजार पर असर
- कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने की आशंका।
- समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा।
- शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा बढ़ाई।
- बीमा लागत और माल ढुलाई खर्च बढ़ सकता है।
- भारत जैसे तेल आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना।
क्या आगे युद्ध का खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी सैन्य कार्रवाई जारी रही तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
