पुरी के गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और पीएम मोदी को लिखा पत्र, ISKCON की अलग रथयात्रा पर जताई आपत्ति

पुरी के गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और पीएम मोदी को लिखा पत्र, ISKCON की अलग रथयात्रा पर जताई आपत्ति

भगवान श्रीजगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने 8 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ISKCON (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) द्वारा अलग-अलग तिथियों पर जगन्नाथ रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है।

गजपति महाराज ने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव, जो श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि ISKCON कई देशों और स्थानों पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और स्नान यात्रा का आयोजन उन तिथियों पर कर रहा है, जो पारंपरिक हिंदू पंचांग और शास्त्रों के अनुरूप नहीं हैं।

उनका कहना है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान सदियों से निश्चित तिथियों और परंपराओं के अनुसार आयोजित होते आए हैं। अलग-अलग तारीखों पर इन आयोजनों से धार्मिक भ्रम की स्थिति पैदा होगी और श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत होंगी।

गजपति महाराज ने क्या कहा?

अपने पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।

उन्होंने लिखा कि यदि अलग-अलग संस्थाएं अपनी सुविधानुसार तिथियां तय करके रथयात्रा आयोजित करेंगी, तो भविष्य में मूल परंपरा कमजोर हो जाएगी और धार्मिक अनुशासन पर भी असर पड़ेगा।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि इस विषय पर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपरा, धार्मिक मर्यादा और शास्त्रसम्मत व्यवस्था सुरक्षित रह सके।

उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों में एकरूपता बनाए रखना आवश्यक है, जिससे देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो।

भक्तों की भावनाओं का भी किया जिक्र

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ के श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बन रही है। गजपति महाराज का कहना है कि धार्मिक परंपराओं का पालन शास्त्रों के अनुसार ही होना चाहिए और इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन उचित नहीं माना जा सकता।

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