

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका ने ईरान से ऊर्जा आयात पर 60 दिनों की सीमित छूट देने का फैसला किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस फैसले से भारत को सस्ता तेल मिलेगा और क्या ऊर्जा संकट की आशंकाएं कम होंगी?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण भारत को कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक, चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है। होर्मुज़ मार्ग से भारत के करीब 45 प्रतिशत कच्चे तेल, 50 प्रतिशत एलएनजी और 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी छूट के बावजूद भारत को सीधे तौर पर बड़ी मात्रा में ईरानी तेल मिलने की संभावना कम है। इसकी वजह ईरानी तेल के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े भुगतान जोखिम हैं।
हालांकि, एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है, जिससे भारत को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है और भारत को ऊर्जा आयात के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की तुलना में एलपीजी के क्षेत्र में भारत को ज्यादा राहत मिल सकती है, क्योंकि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत बड़ी मात्रा में एलपीजी आयात करता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल पर निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अमेरिकी दबाव और टैरिफ नीतियों के चलते भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव करना पड़ा। ऐसे में ईरान पर अमेरिकी रियायत भारत के लिए सीमित लेकिन महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है।
